शिवांश खाद

18 दिनों में तैयार। केवल पौधों की सामग्री, पशुओं का गोबर और कुछ पानी के साथ बनाया गया। मजबूत पौधे, आश्चर्यजनक परिणाम।

शिवांश खाद

18 दिनों में तैयार। केवल पौधों की सामग्री, पशुओं का गोबर और कुछ पानी के साथ बनाया गया। मजबूत पौधे, आश्चर्यजनक परिणाम।

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शिवांश खेती

हमने दुनिया भर के लाखों छोटे-भूखंड वाले किसानों के लिए लगभग मुफ्त, उच्च प्रभाव समाधानों की पहचान करने के लिए यह पहल शुरू की।

शिवांश फर्टिलाइजर एक लागत-मुक्त खाद है जो अनुपजाऊ भूमि को एक संपन्न खेत में बदल सकता है, जिससे किसान खेतों में रसायनों के इस्तेमाल को कम या पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं।

विकासशील देशों में अधिकांश किसान खेतों में होने वाले महंगे निवेशों के कारण कभी न खत्म होने वाले ऋण चक्रों में फंस जाते हैं।

हमारी तकनीकें किसानों को आसानी से उपलब्ध सामग्रियाँ जैसे कि पत्तियां, पशु खाद, और पानी से अपनी मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को जल्द से जल्द पुनर्जीवित करने के लिए एक स्पष्ट मार्ग प्रदान करती हैं।

हमारे अधिकांश कार्य प्राचीन खेती प्रथाओं से प्रेरित हैं जिसने पीढ़ियों तक सभ्यता को कायम रखा है । यह काफी सरल है; स्वस्थ मिट्टी, मजबूत पौधों को उगाती है। यह किसानों की पिछली पीढ़ियों का फोकस था, और यह आज भी हमारी संस्था के प्रयासों का केंद्र बना हुआ है।

हमारे अनुसंधान फार्म

हमारी संस्था नई दिल्ली में स्थित हमारे अनुसंधान फार्म में सरल और प्रभावी कृषि तकनीकों का परीक्षण करती है। 2014 के बाद से, हमारी भूमि ने साल दर साल पौष्टिक फसल का उत्पादन किया है। हम दुनिया भर में पाए जाने वाले पारंपरिक छोटे खेतों की तुलना में बिना रसायन, कम श्रम और बहुत कम पानी का उपयोग करते हैं।

भारत के गांवों में प्रशिक्षण

द हंस फाउंडेशन और इसके सहयोगियों द्वारा भारत के आसपास के हज़ारों किसानों को प्रशिक्षित किया गया है। ग्रामीण समुदायों की आय और खाद्य सुरक्षा में वृद्धि हुई हैं और कुपोषण को काफी कम कर दिया है। उनकी निम्‍नीकृत भूमि जीवन में वापस आ गई है, और बिना रसायनों के उच्च गुणवत्ता वाली उपज का उत्पादन करती है।

हमारे संस्थापक की कलम से

“हमारा लक्ष्य इन जीवन बदल देने वाली सरल तकनीकों का दुनिया भर के लाखों किसानों में प्रचार करना है।”


मनोज भार्गव
अरबपति एवं समाज-सेवी

हमारे संस्थापक की कलम से

“हमारा लक्ष्य इन जीवन बदल देने वाली सरल तकनीकों का दुनिया भर के लाखों किसानों में प्रचार करना है।”


मनोज भार्गव
अरबपति एवं समाज-सेवी


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हमारे संस्थापक की कलम से

पूरे मानव इतिहास में किसानों ने हजारों वर्षों तक स्वयं को और बड़े पैमाने पर बढ़ती शहरी आबादी का लालन-पालन किया है । उन्होंने हमेशा भूमि को अगली पीढ़ी के लिए अधिक उपजाऊ और उत्पादक बनाया है । उसी भूमि पर सदियों तक अनाज उगाया गया और आसपास के शहरों में खिलाया गया , जिनमें से कई आज भी बसे हुए हैं; नई दिल्ली, वाराणसी, रोम, एथेंस, मैक्सिको सिटी, टोक्यो, बीजिंग, आदि।

खेतों में साल-दर-साल प्रचुर मात्रा में फसल पैदा होती थी। किसी कीटनाशक या सिंथेटिक पोषण के अभाव में मिट्टी स्वस्थ और प्राकृतिक थी।

आज जब हम बंजर भूमि, जहरीले भोजन, और लाखों गहरे गरीब किसानों से जुड़ी खबरें देखते हैं, तो हम केवल अतीत को आश्चर्य से देख सकते हैं।

पहले किसानों द्वारा मिट्टी को पुनर्जीवित करने के तरीके, सिंचाई के लिए कम पानी का उपयोग करना, और मजबूत स्वस्थ पौधों को उगाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विधियाँ सरल थीं|

फसल उत्पादन को वास्तव में समझने के लिए, हमने अपनी जमीन पर प्रयोग किया। थोड़े समय में, हम किसी भी सिंथेटिक रासायनिक के बिना बड़े पैमाने पर फसल का उत्पादन कर रहे थे। मैं कुछ सरल तकनीकों का उपयोग करके, अपने पुरे परिवार को पूरे वर्ष के लिए पौष्टिक भोजन प्रदान करने में सक्षम था। हमें यह महसूस करने में बहुत अधिक समय नहीं लगा कि ये सरल तकनीकें दुनिया भर के गाँवों में लाखों किसानों को हमारी तरह प्रचुर मात्रा में उत्पादन करने के लिए समर्थ बना सकती हैं |

हमारी संस्था ने मुफ्त में दुनिया भर के ग्रामीण दर्शकों के लिए स्पष्ट निर्देशात्मक वीडियो बनाकर और उन्हें ऑनलाइन पोस्ट करने का कार्य किया है ।

हमें नहीं पता कि यह यात्रा हमें कहां ले जाएगी, या हम कितने जीवन को प्रभावित कर पाएंगें, लेकिन आसान और स्पष्ट मार्गदर्शन का सर्जन करना एक शक्तिशाली पहला कदम होगा।

– मनोज

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हमारे साथ जुड़े

दिल्ली में हमारे अनुसंधान फार्म से नई अनुदेशात्मक सामग्री और परिणामों के साथ अपडेट रहें।

         

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स्वस्थ, समृद्ध मिट्टी। सिंचाई आवश्यकताओं में कमी। कम लागत। कोई कृत्रिम उर्वरक नहीं। कोई जहरीला छिड़काव नहीं। रोग प्रतिरोधक फसलें। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन। गैर-विषाक्त। हर तरह से सुरक्षित और प्राकृतिक।

               

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